Saurabh Dandriyal
2 MAY 2026

The Indian Pulse

Yogi gifts mohan

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बरगी हादसे के पीड़ितों से मुलाकात, सरकार हर कदम पर साथ

बरगी हादसे के पीड़ितों से मुलाकात, सरकार हर कदम पर साथ

जबलपुर में बरगी में हुए दुखद हादसे में प्रभावित परिवारों से मिला। इस घटना में परिजनों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उसकी भरपाई संभव नहीं है। उनके इस असहनीय दुःख में राज्य सरकार साथ खड़ी है। शोकाकुल परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। कठिन समय में पीड़ित परिवार स्वयं को अकेला न समझें। इस हादसे में 28 लोगों को बचाया गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। जो लापता हैं, उनकी तलाश की जा रही है।

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हिमंता का ‘पेड़ा’ बना खेड़ा के लिए संजीवनी, सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को दी अग्रिम जमानत

हिमंता का ‘पेड़ा’ बना खेड़ा के लिए संजीवनी, सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को दी अग्रिम जमानत

NEW Delhi : Pawan Khera Bail: असम CM हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुईंया पर की गई टिप्पणी के मामेल में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है. गुरुवार को कांग्रेस नेता की याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद शुक्रवार ने खेड़ा को कुछ शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दे दी. सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह मामला हिरासत में पूछताछ की जरूरत वाला कम, बल्कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का ज्यादा है. Supreme Court of India ने कांग्रेस नेता Pawan Khera को अग्रिम जमानत देते हुए मामले को संतुलित और कानूनी नजरिए से देखा है। अदालत का मुख्य फोकस यह रहा कि जांच और व्यक्तिगत स्वतंत्रता दोनों के बीच संतुलन बना रहे। # मामले को सरल और न्यूट्रल तरीके से समझें इस केस में पवन खेड़ा पर कुछ आरोप लगाए गए थे, जिनके आधार पर पुलिस उनसे पूछताछ करना चाहती थी। खेड़ा ने आशंका जताई कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, इसलिए उन्होंने अग्रिम जमानत की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए कहा कि पहली नजर में यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। ऐसे मामलों में तुरंत गिरफ्तारी जरूरी नहीं होती, खासकर जब जांच बिना हिरासत के भी की जा सकती हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि: * आरोप सही हैं या नहीं, इसका अंतिम निर्णय ट्रायल (अदालती प्रक्रिया) के दौरान ही होगा * फिलहाल, गिरफ्तारी को जरूरी कदम नहीं माना गया * जांच एजेंसियां बिना गिरफ्तारी के भी अपना काम जारी रख सकती हैं # जमानत की शर्तों का मतलब अदालत ने जमानत देते समय कुछ शर्तें लगाईं, जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच प्रभावित न हो: * खेड़ा को जांच में सहयोग करना होगा * पुलिस जब बुलाए, तब उन्हें उपस्थित होना पड़ेगा * वे किसी भी सबूत के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकते * बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जा सकते * ट्रायल कोर्ट जरूरत के अनुसार और शर्तें जोड़ सकता है # इस फैसले का व्यापक मतलब यह फैसला इस सिद्धांत को दोहराता है कि: * गिरफ्तारी हमेशा अंतिम विकल्प होनी चाहिए, खासकर तब जब जांच बिना हिरासत के संभव हो * अदालतें यह सुनिश्चित करती हैं कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का अनावश्यक हनन न हो * साथ ही, जांच प्रक्रिया भी बिना बाधा के जारी रह सके संक्षेप में, कोर्ट ने न तो आरोपों को सही ठहराया है और न ही गलत—बल्कि यह कहा है कि **सच का फैसला ट्रायल में होगा, अभी केवल प्रक्रिया को संतुलित रखना जरूरी है।**

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